Mahartha Manjari महार्थमन्जरी

Mahartha Manjari महार्थमन्जरी

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Product Code :CSG 455

Author : Shayamakanta dwiwedi

ISBN :

Bound : Hard Cover

Publishing Date : 2008

Publisher : Chaukhamba Surbharati Prakashan

Pages : 648

Language : Sanskrit Text with Hindi Translation

Length: 22 cm

Width : 14 cm

Height : 5 cm

Weight : 870 gm

Availability : 100

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₹960.00 ₹1,200.00/ 20 %

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महार्थमञ्जरी (Maharthamanjari) कश्मीर शैव धर्म (कश्मीरी शैववाद) के प्रत्यभिज्ञा दर्शन का एक अत्यंत गूढ़, दार्शनिक और रहस्यवादी ग्रंथ है

महार्थमञ्जरी से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  • रचयिता: इसकी रचना 12वीं-14वीं शताब्दी के दौरान महान संत और योगी महेश्वरानंद द्वारा की गई थी। वे स्वयं 'शिवानंद' के शिष्य थे。
  • भाषा एवं शैली: यह ग्रंथ मूल रूप से 'महाराष्ट्री प्राकृत' में लिखे गए 70 श्लोकों का संग्रह है। महेश्वरानंद ने बाद में इस पर संस्कृत में एक विस्तृत टीका लिखी, जिसे परिमल (Parimala) कहा जाता है。
  • दार्शनिक महत्व: यह ग्रंथ 'त्रिक' दर्शन और 'क्रम' प्रणाली के सिद्धांतों पर आधारित है। इसमें विशुद्ध चेतना (शिव), पराशक्ति, और आत्म-साक्षात्कार को सर्वोच्च सत्य बताया गया है。
  • अलौकिक उत्पत्ति: इस ग्रंथ के बारे में मान्यता है कि यह रचना किसी सामान्य बौद्धिक प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि एक उच्च अलौकिक चेतना (सुपर-कॉन्शियसनेस) की अवस्था में प्रकट हुई थी。
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