Product Code :CSG 740
Author : Shri Shiv Prasad Diwedi ji
ISBN : 9789349703216
Bound : Hard Cover
Publishing Date : 2026
Publisher : Chaukhamba Surbharati Prakashan
Pages : 6121
Language : Sanskrit text with Hindi commentary
Length: 25 cm
Width : 19 cm
Height : 48 cm
Weight : 13000 gm
Availability : 10
महर्षिवाल्मीकिप्रणीतं
श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणम्
सानुवाद-लब्धप्रतिष्ठ-संस्कृतटीकात्रयविराजितम्
(गोविन्दराजकृत 'भूषण' अहोबलाचार्यकृत 'तनिश्लोकी' रामानुजाचार्यकृत 'रामानुजीय') सर्वजनबोधगम्य 'भावप्रकाशिका' नाम्न्या हिन्दीव्याख्ययालङ्कृतञ्च
महर्षि वाल्मीकि प्रणीत श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण की तीन सर्व प्रतिष्ठित संस्कृत टीकाएं, यथा-गोविन्दराजकृत 'भूषण', अहोबलाचार्यकृत 'तनिश्लोकी' तथा रामानुजाचार्यकृत 'रामानुजीय' तथा इन सभी की सुबोध एवं भावानुकूल 'भावप्रकाशिका' नामक हिन्दी व्याख्या सहित
श्रीमद्वाल्मीकीयरामायणम् भारतीय वाङ्मय की अमूल्य निधि और सनातन भारतीय संस्कृति के आदर्श जीवन-मूल्यों का अनुपम महाकाव्य है। महर्षि वाल्मीकि द्वारा प्रणीत यह दिव्य काव्य श्रीराम के मर्यादा, धर्म, सत्य, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा से युक्त आदर्श चरित्र तथा जनकनन्दिनी श्रीसीता के त्याग, धैर्य, पतिव्रत-धर्म और नारी गरिमा के उदात्त स्वरूप को प्रस्तुत करता है। श्रीराम, श्रीसीता, लक्ष्मण, भरत, हनुमान आदि चरित्रों के माध्यम से रामायण भारतीय जीवन-दर्शन, पारिवारिक आदर्श, राजधर्म, लोकधर्म और मानवीय मूल्यों का शाश्वत संदेश प्रदान करती है।
रामायण के गहन एवं बहुआयामी अर्थ को समझने के लिए संस्कृत में अनेक विद्वानों ने टीकाओं की रचना की। प्रस्तुत विशिष्ट संस्करण में तीन महत्त्वपूर्ण एवं प्रतिष्ठित संस्कृत टीकाओं को एक साथ संकलित किया गया है-श्रीगोविन्दराजकृत 'भूषण', अहोबलाचार्यकृत 'तनिश्लोकी' तथा रामानुजाचार्यकृत 'रामानुजीय'। इनमें 'भूषण' अपनी विस्तृत, विद्वत्तापूर्ण एवं समासबहुल शैली के कारण विशेष महत्त्व रखती है। इसमें रामायण के पदों और प्रसंगों के अर्थ के साथ व्याकरण, काव्यशास्त्र, अलंकार, दर्शन, वैदिक विषयों तथा श्रीवैष्णव सिद्धान्तों का विवेचन मिलता है। रामायण के पात्रों एवं घटनाओं से उत्पन्न संभावित शंकाओं को उठाकर उनके समाधान प्रस्तुत करना भी इसकी विशिष्ट विशेषता है। 'तनिश्लोकी' अत्यन्त संक्षिप्त होते हुए भी अनेक गूढ़, रहस्यात्मक एवं साम्प्रदायिक भावों को प्रकाशित करती है। वहीं 'रामानुजीय' संक्षिप्त एवं सारगर्भित शैली में श्लोकों के क्रम, औचित्य तथा पदों के अर्थ को स्पष्ट करती है।
यह संस्करण रामायण के मूल पाठ के साथ उसकी समृद्ध टीका-परम्परा को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने वाला एक महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी ग्रन्थ है। इस संस्करण में तीनों संस्कृत टीकाओं को सर्वजनबोधगम्य बनाने के उद्देश्य से 'भावप्रकाशिका' नामक हिन्दीव्याख्या प्रस्तुत की गयी है। इसमें मूल रामायण तथा इन संस्कृत टीकाओं में निहित भावों, तात्पयों और व्याख्यात्मक विषयों को सरल, स्पष्ट एवं सुबोध हिन्दी में प्रस्तुत किया गया है, जिससे विद्यार्थी, अध्यापक, शोधार्थी तथा सामान्य पाठक भी इनके गूढ़ अर्थों को सहजता से समझ सकें।
प्रस्तुत संस्करण की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विशेषता यह है कि 'भूषण', 'तनिश्लोकी' और 'रामानुजीय' जैसी इन तीनों संस्कृत टीकाओं के समन्वित हिन्दी रूपान्तरण एवं व्याख्या को 'भावप्रकाशिका' के माध्यम से पहली बार किसी भाषा में प्रस्तुत किया जा रहा है।